रविवार, 3 जुलाई 2011


मेरे जन्म के बाद ,माँ
अन्य माओं की तरह
तूने भी संभाला मेरे शरीर को
व्यस्त रही सदा
इसे पालने ,पोसने ,और ढकने में !
इस फेर में माँ ,तू
मेरे मन को पालना भूल गई
यह भटकता रहा फिर
लावारिसो की तरह
जाने किन किन लोगों के बीच
क्या क्या कर्म अकर्म करता रहा
खुराक न मिलने पर राम नाम की
मन का नंगापन्  बढता गया
इसकी दरिंदगी और वहशीपन्
सीमाओं से पार होता गया
शुक्र करो माँ गुरुवर चाक चौबंद  थे
निहार रहे थे ,मेरा हर कमीनापन
बर्दास्त न कर सके तो कूद पड़े
मेरा हाथ पकड़ा कसकर
मेरे फडफडाने पर उनकी पकड़
कसती गई
और जकडन बढती गई .................
जब तक की मै बेदम नहीं हो गया !
मेरा हाथ पकडकर
गुरुवर फिर दौड पड़े
कूड़े के ढेर के उस पार ................
बिना देखे की मै दौड रहा हूँ या
घिसट रहा हूँ
हँस रहा हूँ या बिलख रहा हूँ
क्योंकि वे सदाशिव जानते थे की
मेरा भला क्या है ?
वे दौड पड़े,कहीं ऐसा न हो की
नाकों में बसी सडांध को
मै सुगंध मान बैठूं ,
फिर से वही न रम जाऊँ
और दौड़ते ही रहे ...................
जब तक की भोर की वह उजास
दिखा न दी
उसकी एक हलकी किरण मन में बसा न दी !
अब कुछ नहीं चाहिए
कहता है मन गुरुवर गुरुवर रटते रहिये
उस किरण ने माँ
मुझे मदहोश कर दिया
दुनिया के रंगों के प्रति बेहोश कर दिया
उस उजास ने माँ, एक नया द्वार खोल दिया
वह द्वार
जिसके आनंद को बिरलो ने लिया
वह आनंद जिसे दुनिया ने पागलपन
और ज्ञानियों ने अवर्णनीय कहा
और ये सब गुरुवर बिन संभव न था !
अब जारी  है माँ ,उनकी कृपा वृष्टि
उन बिन
अब निस्सार लगती है माँ सृष्टि !
अब दौड जारी है माँ
वे आगे आगे और मै पीछे पीछे
वे पूरी तरह सतर्क 
मेरे प्रयासों के नहीं होने पर सार्थक
मेरे उदास होने पर
हताश होने पर
इधर उधर खोने पर,थक कर बैठ जाने पर
उन्हें नहीं पकड पाने पर
खीजने पर या झल्लाने पर
फिर से कूड़े की और मोहित हो जाने पर
वे सदाशिव द्रुत गति से उलटे पैर दौड़े आते है
मुझे झिझोड़कर या सहलाकर
नींद से जगाकर या ठोकर लगाकर
मंद होते मेरे होसलें को बढाकर
पस्त होती मेरी हिम्मत को
पुनः बंधाकर
नाकों में डेरा डालने को आतुर सडांध को
अपनी मोहनी गंध से उडाकर
कभी फिर से वे ही झलकियाँ दिखाकर
फिर से उतनी ही दूर पहुँच जाते है !
वही मोहक गंध माँ
मुझे खीचें जा रही है  जिस दिन
अपने तीव्रतम स्वरूप में होगी वह गंध
वह दिन तेरे मेरे साथ का आखरी दिन होगा
काश की माँ तुम भी वह गंध महसूस कर पाती
मदहोश कर देने वाली
उस उजास की एक  झलक देख पाती
तेरे मरने के बाद मेरा क्या होगा
तेरी ये चिंता सदा सदा के लिए
मिट जाती !