गुरुवार, 19 मार्च 2015

Quality education
Thursday, March 19, 2015
8:32 PM
भिन्न भिन्न सेमिनारो से पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से व् कार्यशालाओ के माध्यम से यह बताया जा रहा है की नीतियाँ बनाने व् शिक्षण सामग्री पर बहुत अधिक  खर्च हो रहा है | निसंदेह नियत अच्छी है पर उतना सुधार परिलक्षित नहीं हो रहा जितना अपेक्षित है ,infrastructure के स्तर पर अब विकास दिखने लगा है | शिक्षा में गुणवत्ता का वांछित सुधार व् स्तर अभी दिखाई नहीं दे रहा है अगर सरकार व् अध्यापक कार्य नहीं करते तो जो ढाचां गत विकास दिखा है वह नहीं दिखता |इसका अर्थ है की अध्यापक व् इससे जुडी इकाइयों ने अपना कार्य किया है ,फिर क्या हुआ की पढने पढ़ाने में व् सिक्षा की गुणवत्ता में उतना सुधार क्यों नहीं हुआ जो होना चाहिए |
मै समझता हूँ इसके कुछ कारण इस प्रकार हो सकते है
१ शिक्षण के सिधान्तो को बनाना एक बात है और परन्तु उन्हें लागु करना दूसरी बात है और मुझे लगता है इसी स्तर पर हमसे बार बार चूक हो रही है
समाधान : अगर नीतियाँ बनाने से पहले हमारे एक्सपर्ट खंड स्तर पर पांच स्कूलों में कम से कम दो दो महीने पढ़ाकर देखें व् वहां कार्यरत अध्यापको को कक्षाएं पढाकर दिखाएँ की इस प्रकार विविधताओं से भरी कक्षा में शिक्षण कार्य करना है |
इसके दो फायदे होंगे
१ प्रथम तो माडल शिक्षण को अपने सामने क्रियान्वित होते देखकर बाकी  सभी अध्यापको की शैली में रचनात्मक सुधार होगा व् शिक्षक वर्ग दो महीने एक्सपर्ट के सम्पर्क रहकर अपने ज्ञान स्तर को बनाये रख सकेगा व् शिक्षण व् शिक्षण की नवीनतम विधियों को सीख भी सकेगा व् अपनी आखों के सामने उनका क्रियान्वन भी देख सकेगा |
२ दुसरे एक्सपर्ट भी ग्राउंड लेवल की समस्याओं को व् विविधताओं से भरी कक्षा को साकार रूप में देख व् जान सकेंगे व् भविष्य की नीतियों व् पाठ्यक्रम को बनाते समय वे स्थिति से पूर्णतया परिचित भी होंगे क्योकि काल्पनिक स्तिथियों को मानकर पालिसी बनाना एक बात है और ग्राउंड पर उनका उपयोग करना दूसरी बात है और मै समझता हूँ उपरोक्त प्रकार से कार्य कर हम हम दोनों ही स्थितियों से निजात पा सकते है
और हमारे सामने समस्या यही है की कोई भी उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति निचले पायदान पर कार्य करने की सोचता ही नहीं हर शोधार्थी या पीएचडी धारी विश्वविद्यालय स्तर पर काम करने पर जहाँ गर्व अनुभव करता है वहीं शिक्षा की जड़ों में जाकर उसे सिचनें में अपनी तौहीन समझता है | हमारी व्यवस्था ने ऐसा माहौल बना दिया है कि अधिकतर उच्च शिक्षित लोगों को आदेशात्मक पद चाहिए.
इतना परिश्रम व् धन का व्यय करने के बाद भी जो स्तर पाने को हम आज भी लालायित है, हो सकता है एक्सपर्ट को जमीन पर भेजकर सहज ही प्राप्त हो जाये | नहीं तो मुझे लगता है की कहीं क्वालिटी एजुकेशन हमारे लिए दिवा स्वप्न ही बनकर न रह जाये |