गुरुवार, 29 जून 2017

तेरे श्रंगार

              तेरे श्रंगार
तेरा यौवन,
उठा देता है दुनिया भर की निगाहे
लाता है तेरे लिए दुनिया भर की मुसीबत
दो चुडियां पर
मिटा देती है आधी आफत को
नज़र आने पर इनके
आधी दुनिया की सोच बदल जाती है
चाह बदल जाती है
तिस पर चमकता सिन्दूर मिटा डालता है
बची आधी आफत को
जगा देता दुनिया के मनो में तेरे लिए श्रध्दा
बना देता तुझे आदरणीय
बन कर खड़ा हो जाता है तेरी ढाल
फिर ऊँगली पकड़े बच्चा
लाता है तेरे लिए सौगात
मिटा डालता है बची आफतों का भंडार
बना देता है तुझे वसुंधरा सम
बनाता है तुझे, सजग, चेतन और पूजनीय
जो तैयार थे कभी तूझे लूटने को
अब तुझ पर आदर लूटाते है
अब भी पर कुछ सिरफिरे
 आहें उड़ाते है
उनका कोई इलाज नहीं
उनके लिए तेरी ढाले बेमानी है
उनके लिए तुझे अपनी चप्पल उठानी है
यही तेरा अंतिम ब्रह्मास्त्र
जो दिया था हमने तुझे
तेरी सगाई पर,विवाह में
हर वर्ष और अनेकों बार
विश्वास रख अचूक जायेगा
इसका वार
ये चला नहीं कि
तुझे सबका साथ मिला नहीं
इसलिए अपने श्रंगारो को सम्हाल
मत समझ इन्हें जंजाल
इन्ही से तू मालामाल
वर्षों के हमारे शोध और तपस्या का परिणाम
तेरे हथियार

ये तेरे श्रंगार. 

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