सोमवार, 9 मई 2011

भेंट


आज मातृ दिवस पर
जगह जगह होंगी
गोष्ठियां और भाषण
किया जायेगा बखान की
अरी माँ तू ये है
अरी माँ तू वो है
अरी माँ तू
मेरी दुनिया है ,मेरा जहान है
अरमान है ,मेरी शान है
कल फिर किसी कोने में पड़ी
सिसक रही होगी, कल फिर 
किसी माँ की चीख
निकल रही होगी
और तेरा ये दिवस
दब जायेगा दिवसों के ढेर में
अगले वर्ष अपनी बारी आने तक
कुछ  लोग तुम्हें भेंट देंगे ,बुक्का देंगे
तेरी फोटो उतारेंगे
अखबार सजेंगे
गुणगान होगा
पर अगले दिन
तेरा वही पिछला हाल होगा
तू कहीं सड़क पर
बच्चा जन रही होगी
कहीं तेरी आबरू लुट रही होगी
पर इस बार माँ ,मै मातृ दिवस
अपने ढंग से मनाऊंगा
औरो की देखा देखी
मै तुझे ये भाषण ,बुक्का, फूल
और शाल न दूँगा
इस बार मै तुझे एक वचन देता हूँ
भेंट में, की
जहां भी मै तुझे संकट में देखूंगा
तेरी सेवा में कूद पडूंगा
बिना देखे की तू अमीर है या गरीब है
अनपढ़ या पढ़ी
साफ है या मैली ,क्योंकि
माँ तो फिर माँ है
अपनी क्या पराई क्या
तेरी क्या मेरी क्या
माँ तू बस माँ है मेरे लिए
सब में मै देखूंगा बस तेरी छवि
इश्वर की सर्वव्यापकता की तरह
इस मातृ दिवस अर्पण है तुझे
मेरा ये वचन .   


गुरुवार, 5 मई 2011

चाहता कौन है

मूक देख रहा
 शहीद बेचारा मौन है
देख कर देश की हालत
सोच रहा ,भ्रष्टाचार रुके
इस देश में चाहता कौन है !
पछता रहा बेचारा
खोकर अपनी अमोल जवानी
उसे पता है
जवानी का क्या मोल है
घपले न हो यहाँ चाहता कौन है
देख कर आज
अपने अधिकारीयों कर्मचारियों की करनी
सोचता है
इस दुनिया में बलिदानों का क्या मोल है
रुके बेईमानी भ्रष्टाचार
यहाँ चाहता कौन है
न्याय मांगने वालो से लेकर
न्याय देने वालों तक
सब लिपटे नज़र आते है
पीड़ित तो उस दिन से
अब तक पीड़ित है
उनकी पीडाए मिटे
अपने देश में चाहता कौन है
ताकत सत्ता न आने तक
सब चिल्लाते है
सता ,ताकत आने पर सब मौन है