जगह जगह होंगी
गोष्ठियां और भाषण
किया जायेगा बखान की
अरी माँ तू ये है
अरी माँ तू वो है
अरी माँ तू
मेरी दुनिया है ,मेरा जहान है
अरमान है ,मेरी शान है
कल फिर किसी कोने में पड़ी
सिसक रही होगी, कल फिर
किसी माँ की चीख
निकल रही होगी
और तेरा ये दिवस
दब जायेगा दिवसों के ढेर में
अगले वर्ष अपनी बारी आने तक
कुछ लोग तुम्हें भेंट देंगे ,बुक्का देंगे
तेरी फोटो उतारेंगे
अखबार सजेंगे
गुणगान होगा
पर अगले दिन
तेरा वही पिछला हाल होगा
तू कहीं सड़क पर
बच्चा जन रही होगी
कहीं तेरी आबरू लुट रही होगी
पर इस बार माँ ,मै मातृ दिवस
अपने ढंग से मनाऊंगा
औरो की देखा देखी
मै तुझे ये भाषण ,बुक्का, फूल
और शाल न दूँगा
इस बार मै तुझे एक वचन देता हूँ
भेंट में, की
जहां भी मै तुझे संकट में देखूंगा
तेरी सेवा में कूद पडूंगा
बिना देखे की तू अमीर है या गरीब है
अनपढ़ या पढ़ी
साफ है या मैली ,क्योंकि
माँ तो फिर माँ है
अपनी क्या पराई क्या
तेरी क्या मेरी क्या
माँ तू बस माँ है मेरे लिए
सब में मै देखूंगा बस तेरी छवि
इश्वर की सर्वव्यापकता की तरह
इस मातृ दिवस अर्पण है तुझे
मेरा ये वचन .
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