गुरुवार, 5 मई 2011

चाहता कौन है

मूक देख रहा
 शहीद बेचारा मौन है
देख कर देश की हालत
सोच रहा ,भ्रष्टाचार रुके
इस देश में चाहता कौन है !
पछता रहा बेचारा
खोकर अपनी अमोल जवानी
उसे पता है
जवानी का क्या मोल है
घपले न हो यहाँ चाहता कौन है
देख कर आज
अपने अधिकारीयों कर्मचारियों की करनी
सोचता है
इस दुनिया में बलिदानों का क्या मोल है
रुके बेईमानी भ्रष्टाचार
यहाँ चाहता कौन है
न्याय मांगने वालो से लेकर
न्याय देने वालों तक
सब लिपटे नज़र आते है
पीड़ित तो उस दिन से
अब तक पीड़ित है
उनकी पीडाए मिटे
अपने देश में चाहता कौन है
ताकत सत्ता न आने तक
सब चिल्लाते है
सता ,ताकत आने पर सब मौन है
 

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