नारी या नारिया
झंडू बोलयो
अपणी स ब्याह की तैयारी
मै बोल्यो
ब्याह खातर चाहिए एक नारी
अर इब आवै स नारिया
तू बता के ल्यावैगो
नारी अक नारिया
झंडू बोल्यो या कैतरा,मै बोल्यो
एक दिन मै पडोस क घरां गयो
अर आवाज लगाई ,कठे सा ताई
इतना मै चुन्नी न ऊपर नीचे करती कोई आई
बोली भाई साहब राम राम
मै बोल्यो बहनजी राम राम
मेरो बहन जी कहणो थो
अर उठे तमाशो वहणो थो
ताई लगी बडबडाण
बोलण को ना बेरो
के भाई लागै स यो तेरो
जेठा न भाई कहंण लागगी
तेरी मति क, के दीवल लागगी
अर ताई उन्नै एक त एक डायलोग सुनाण लागगी
डायलोग सुण क इब बहू भी मिणमिणाण लागगी
व तो भाई कोठा मा स ही तीर चलाण लागगी
अर ताई न किमी किमी बकण लागगी
फेर के थो
मै तो पाछा न हो गयो
अर उण क घरां महाभारत शुरू वह गयो
एक ती बढ़ क एक गोला बगावै थी
वा उन्नै अर वा उन्नै शौक बतावै थी
भोत सोहणी बतला रही थी
दोनू एक दूसरी को इतिहास गा रही थी
उरा उरा की छोड़
पीहर तक निशानों लगा रही थी
उण की आवाज़ सारा मोहल्ला की शोभा बढ़ा रही थी
आवाज़ सुण क, ताऊ ताश छोड़ क आयो
मै बोल्यो ताऊ, congratulation
रोला न सुण क ताऊ घबरायो
मेरी congrt.सुण क हडबडायो
अर बोल्यो क्यां की congrt. भाई
मै बोल्यो झंडू एक ब्याह न भी रोवै स
अर तेरो दो दो म नम्बर होवै स
ताऊ आँख काढ क बोलो के गावै स
मै बोल्यो मेरा कानी के आँख काढ़ा सा
व देख,सारा मोहल्ला न सुणाण लागरी
ताई अर बोह्डिया एक दूसरी न शौक बताण लागरी
अरै उनकी बातां मै मतना जावा
तू के सोचा ये मेरी भार्या स
अर ई तो बिना नाथ का नारिया स
ईब तू बता झंडू
मेरी के गलती स
जो ल्या रह्यो स वाही नारिया बता रह्यो स
तू ल्याणो चाहवा सा नारी
अर ईब आवै स कलिहारी
झंडू बोल्यो
भाई बताण लागगो तो सारी बता
मै बोल्यो सुण
अर मुन्नै के बेरो
मै तो आतो जातो सुण लूँ सुं
नू आवाज़ आवै थी
एक जणी टाबरां नै धमकावै थी
कदे छोरा न अर कदे छोरी ठा ठा कै बगावै थी
कदे उन्नै चूहड़ो अर कदे उन्नै चुह्ड़ी बतावै थी
टाबरां न भूं भां मचा राखी थी
अर दादी की छाती जलै थी
एक आध बार नुनै नुनै झांकी कोशिस करी अक ना बोलू
टाबरिया माँ माँ करै था
भाग भाग कै दादी की गोदी मै बडै था
पर वा भी पट्ठी देशी घी खा री थी
बार बार टाबरा न गोदी मा बगारी थी
बस रहण दे के जी काढ़ागी
ई मर गा तो फेर पड़ी पड़ी टाडागी
बूढी को नू कहणो थो, बस आफत आगी
अर वा महाकाली बण क बूढी प छा गई
एक घंटा तक बिना पैसा की कमेंट्री सुणा दई
रोलो सुन क बूढी को छोरो आ गयो
मै बोल्यो भाई तेरी के जात स
वा बोल्यो भाई घर आली क आगै म्हारी के औकात स
तू अपणै स्कूल मै जा
अर जाकै टाबरां न पढ़ा
ईब तू देख ले भाई झंडू
नारी आवै स अक कलिहारी
कदे फेर अण गावं आला की ढाल पछतावा
अर रोज आकै या बात सुणावा
तू ही ठीक रह्यो .