ए मेरी माँ
जो तू कमजोर है तो
ए मेरी माँ ,तू मुझे बता रहने दे
तू कमजोर है या ताकतवर मुझे गर्भ में ही मरने दे
जो तू ताकतवर है, तो मुझे बचा तू भी कमजोर ,मै भी कमजोर
क्यों तकती है निरीह हिरनी सी न तू मेरे लिए लड़ पाती है
खड़ी हो और हथियार उठा न मेरी आवाज़ सुनी जाएगी
हथियार उठा ,अपनी आवाज़ उठा वर्ष वर्षांत तक कहानी यही दोहराई जाएगी
और मुझे बचा एक के बाद एक
काट डाल हर उस हाथ को कन्या तेरे द्वारा ही मारी जाएगी
जो बढ़ता है मेरी और. मजबूरियों और लाचारियों से भरी तू
जो तू ताकतवर है भला मुझे क्या खड़ा होना सिखाएगी
तो क्यों राह तकती है कानून की तू मुझे मत बहका
पुलिस की,संविधान की री बेटी तू बाहर तो आ
तू अपनी आवाज़ बुलंद कर अपनी माँ को सदा संग खड़ा पायेगी
हथियार उठा पर मेरा कहना है री माँ
कानून संविधान और पुलिस अपने आप आ जाएगी. जो तू मेरे लिए
आज हथियार नहीं उठा पाती है
कल क्या बन्दुक चलाएगी .
लाचारियों और मजबूरियों का शाल ओढ़कर
मै नही आना चाहती
तू अपने ही बोझ से दबी है
तुझे मै और नहीं दबाना चाहती
इसलिए जो तू कमजोर है
मुझे मर जाने दे
ताकतवर है तो लड़ और मुझे बाहर आने दे
इतिहास रचाने दे
देश,दुनिया ,धर्म की खातिर
आवाज़ लगाने दे ,बंधी है जो बेड़ियाँ
उनके खुलने का अहसास कराने दे
देख ले माँ
मुझे मर जाने दे
या बाहर आने दे.
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