बुधवार, 30 जनवरी 2013







खिडकियाँ



बालपन मे कुछ समझ न पाते

लड़के और लडकियॉ

सुनी सुनाई बातों से

अपना मानस बनाते

लड़के और लडकियॉ

नवयौवन मे कदम रखकर

पागल हो जाते है

लड़के और लडकियॉ

विवाह के लिए

फिर बच्चो के लिये

जाने किस किस लिये

बेचैन हो जाते है

इतने मदहोश कि

जान न पाते

कब महिला पुरुष बने

लड़के और लडकियॉ

पति पत्नी बनकर

एक दूजे की रखवाली में

जुट जाते है

लड़के और लड़किया

कीचड़ उछाल उछाल कर

कुतो की तरह

लड़ा करते है

लड़के और लड़किया

कभी धन कभी मद

ईंटों, कभी पत्थरों खातिर

लड़ा करते है

यूही पीढ़ी दर पीढ़ी

माता,पिता फिर उनके

बेटा बेटी और फिर..........

लड़ा करते है

युगों युगों से बन

लड़के और लड़किया

पहले बहाना था

अज्ञानी है

अब तुम कॉलेज आए

बदली कहानी है

ज्ञान अर्जन कर सीखे संग संग रहना

लड़के और लड़किया

मौका है अब,कि

खोल ही डाले

भाईचारे की खिडकीयां

इस युग के

लड़के और लड़किया.



























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