क्यों हो रहा है
बच्चे बिगड रहे है
शिकायते आया करती है
अखबार और पत्रिकाए
अक्सर बताया करती है
मनोवैज्ञानिक
कारण और निवारण दे रहे है
पोथे रचे जा रहे है
पर हल नहीं ढूंढॅ पा रहे है
मै कहता हूँ
इसका कोई हल नहीं
क्योकि अब जीवन सरल नहीं
अब तुम मोम डैड हुए
माता पिता के दर्शन
उनको दुर्लभ हुए
जैसे जैसे भारत में मोम डैड बढते जायेंगे
बच्चे बिगड़ते जायेंगे
विदेशों की तरह एक दिन
अपने यहाँ यही हाल होगा
रुपयों से जेब भरी होगी
पर मानव ममता से कंगाल होगा
बूढी आँखे ताकेंगी
पर बच्चों का अपना जहाँ होगा
चाहते हो क्या
वो ही बन जाओ
बच्चे चहिये तो
मोम डैड छोड़कर
माता पिता बन जाओ
वर्ना आगे बढ़ो
मत पछताओ मत पछताओ
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