बुधवार, 30 जनवरी 2013


क्या शिकायत उनसे
जो कभी हमारे न थे
आंसू तो तब आते है,जब
हमारे होकर भी तुम हमारे नहीं
क्यों सपने बनाते हो की
गुलाम नहीं अब भारत
वर्ना,देशभक्ति का मै अपनी
जलवा दिखा देता
तुझ पर ऐ वतन
अपना सब कुछ लुटा देता
पर मै कहता हूँ की
कुछ भी लुटाने की जरूरत नहीं
तुम बस निर्वाह कर दो
अपने कर्तव्य का
देश स्वर्ग बन जाये
तक्षशिला फिर खिल जाये
मेघदूत शकुंतलम से ग्रन्थ
फिर रचे जाये
उर्वशी को आना ही पड़े फिर
रम्भा को गाना ही पड़े फिर
राणा की कुर्बानी काम आ जायेगी
रोती बहन भगत सिहं की चुप हो जायेगी
हुई जो हालत सुभाष की
भरपाई हो जायेगी  
ओ मेरे देश वासी,सुनकर नहीं देख ही लेना
देश सोने की चिड़िया हो जायेगी
इसलिए क्या मलाल की
गुलाम नहीं अब भारत
देशभक्ति का मै अपनी वर्ना  
जलवा दिखा देता
आओ अपने कर्म का जलवा दिखाए
देश को सोने की चिड़िया बनाये .   

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