कितने ही प्रयत्न करे चाहे
माता पिता,दादा दादी,नाना नानी
या दूसरे रिश्ते नाती
कितने ही प्रयत्न करे चाहे
शिक्षक या समाज,पंचायते या खाप
संगठन और मठ
पर दुनिया में शांति न होगी
कितने ही प्रयत्न करे चाहे
शास्त्री और शास्त्र,अस्त्र चाहे सस्त्र
पहने चाहे मानव,नित्य भगवा वस्त्र
कितने ही प्रयत्न करे चाहे
ब्रह्मा और ब्रहामण,नाना योनिया और देवगण
कवि और कविताएँ,या बहती सरिताए
पर दुनिया में ........................
कितने ही प्रयत्न करे चाहे
राग,रागनियाँ या सत्संग कीर्तन
कितनी ही रच डालो चाहे रामायण
या रचा डालो नित महाभारत
जोड़ लो या तोड़ लो
कितने ही अणु और परमाणु
पर दुनिया में ..................................
कितने ही प्रयत्न करे चाहे
विज्ञानी और मनोविज्ञानी
कर डाले जितने चाहे शोध
लिख डालो कोई सा भी वाद
खत्म नहीं होगा पर दुनिया से परिवाद
ले लो जिसका चाहो आशीर्वाद
पर दुनिया में ..........................
पंच विकारों से घिरा है मानव जब तक
कितने ही प्रयत्न करो उस दिन तक
पंच विकार मिल जाते है यू मन में
जैसे मिले दूध जल में
पंच विकारों से हटे बिना
कोई क्रांति न होगी
पंच विकारों से हटे बिना शांति न होगी
भारतीय शास्त्रों में झगड़े का मूल कारण (काम,क्रोध,लोभ मोह,अहं )बताया गया है .हम देखते भी है की हर झगड़े की जड ये अवगुण ही है इसलिए सचमुच शांति चाहिए तो हमारे देश ने अशांति के मूल कारकों को खोजा है और उनसे बचने के उपाय बताये है .जो चाहिए वो ले लो शांति या अशांति फैसला आपका.
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